अन्य संधियों के साथ संबंध
TPNW परमाणु हथियारों से संबंधित पिछली संधियों को सुदृढ़ करता है, जिसमें सन् 1968 की परमाणु अप्रसार संधि शामिल है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों वाले देशों की संख्या को सीमित करना और निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
जैसा कि सन् 1996 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा बताया गया था कि देशों का कानूनी दायित्व है कि वे "परमाणु निरस्त्रीकरण की ओर ले जाने वाली समझौता-वार्ताओं को सद्भावनापूर्वक आगे बढ़ाएं और उन्हें एक निष्कर्ष तक पहुंचाएं"। इस दिशा में प्रगति की कमी ही TPNW पर समझौता-वार्ता के लिए एक प्रमुख प्रेरणा थी।
अन्य पूरक संधियों में सन् 1996 की व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन, दक्षिण प्रशांत, अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य एशिया में परमाणु-हथियार-मुक्त क्षेत्र स्थापित करने वाली क्षेत्रीय संधियाँ शामिल हैं।
TPNW अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून नामक कानूनी व्यवस्था पर आधारित है, जो युद्ध के तरीकों और साधनों को सीमित करता है। सशस्त्र संघर्ष के पक्षों को नागरिकों और सैनिकों के बीच अंतर करने में असमर्थ हथियारों, या अनावश्यक चोट या अनावश्यक पीड़ा देने वाले हथियारों का उपयोग करने से बचना चाहिए।