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सेत्सुको थर्लो

एक 13 वर्षीय लड़की, सेत्सुको थर्लो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम के विस्फोट से बेहोश हो गई थी। वह एक ढह चुकी इमारत के मलबे में फंस गई थी, लेकिन अंततः रेंग कर बाहर निकलने में सफल रही। 

"उस इमारत में मेरे अधिकांश सहपाठी ज़िंदा जल गए," उसने याद किया। "मैंने अपने चारों ओर घोर, अकल्पनीय तबाही देखी... जले हुए मानव मांस की दुर्गंध हवा में फैली हुई थी।" 

परमाणु युद्ध की भयावहता की एक जीवित गवाह, सेत्सुको ने सन् 2017 में ICAN को प्रदान किए गए नोबेल शांति पुरस्कार को संयुक्त रूप से स्वीकार किया। "हर दिन का हर सेकंड, परमाणु हथियार हमारे प्रियजनों और हमारे लिए महत्वपूर्ण हर चीज़ को खतरे में डाल देते हैं," उन्होंने चेतावनी दी। 

"हमें अब इस पागलपन को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।" 

उसने विश्व के नेताओं से हाल ही में अपनाई गई परमाणु हथियार निषेध संधि पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया। " आइए इसे परमाणु हथियारों के अंत की शुरुआत मानें," उन्होंने कहा। "इस संधि में शामिल हों; परमाणु विनाश के खतरे को हमेशा के लिए मिटा दें।"

सन् 2017 में नॉर्वे में नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में सेत्सुको थर्लो। साभार: जो स्ट्रॉब